दिल के तार में एक झनझनाहट सी हुई,
तेरे जाने के बाद भी तेरी आहट सी हुई !!
सोचा था यु ही कट जाएगा ये जिन्दगी का सफ़र,
पर हर् रात जैसे कयामत सी हुई !!
क्या जरुरत है मंदिर मस्जिद जाने की,
तुझे देखना भी तो, इबादत ही हुई !!
जाने क्या होगा तेरे जाने के बाद,
ये सोचकर ही घबराहट सी हुई !!
खुश हो उठता है दिल इन फिजाओं में,
तेरे आने से ही तो यहाँ जगमगाहट सी हुई !!
कुछ समझ नहीं आता, क्या है इस दिल में,
पर ये तय है की हमे मोहब्बत ही हुई !!
इश्क जाग उठता है, रूह मुस्कुरा देती है,
दिल शोर करता है, हमे तुझसे चाहत सी हुई !!
तेरी इन् आखो में, देख लिए मैंने कई सपने,
तू सपना तोड़ न देना, मुझे तेरी आदत सी हुई !!
मन के मंदिर में, तेरी तस्वीर छप गयी,
जब भी गर्दन झुकाई, एक मुस्कराहट सी हुई !!
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