मै लाख छुपाता हूँ, आंसू पी जाता हूँ,
ये दर्द की तन्हाई, पर काटे नहीं कटती !!
मै सोचता रहता हूँ, रातो को जागकर,
क्यूँ मेरी दुआ ही, मांगे नहीं मिलती !!
शबनम की बूंदों में मेरे महबूब का चेहरा,
इतना तो बता दे नज़र, वो आते क्यूँ नहीं दिखती !!
मेरी बंद पलकों में मुझे महबूब है दीखता,
बावजूद इसके भी, मेरी राते नहीं कटती !!
हर जख्म दिल का बयां करना है मुश्किल,
और मेरी सिकायत भी,की वो बाते नहीं करती !!
पहले तो गम का कारवां आता जाता था रहता,
पर आजकल उनसे भी मुलाकाते नहीं मिलती !!
दुनिया के सरे गम दे दो मुझको चाहे,
मेरा गम ले लो, ये भरते नहीं भरती !!
चंद लब्जो में कैसे दिल के जज्बात कह दू,
कुछ बाते ऐसी है जो भुलाये नहीं भूलती !!
मेरा दर भरा चेहरा, उन्होंने न देखा,
वो देख जो लेते तो उनकी राते नहीं कटती !!
वैसे तो चेहरा उनका, मेरी आँखों में है कैद,
दूर होकर भी कभी चाहते नहीं मिटती !!
मेरा दर्द है ऐसा, जो रातो को जगाता है,
सब चैन से है सोते, मुझे नींदे नहीं मिलती !!
जब दुनिया जागती है, तब ये दिल सोता है,
क्या गमे-उल्फत में ऐसा ही होता है !!
Thursday, 24 December 2009
Tuesday, 8 December 2009
ये तो कमाल हुआ
जो कल नहीं हुआ था, वो आज हुआ,
मेरी एक हंसी से वो नाराज हुआ !!
वो देख नहीं सकता था मेरी आँख में आंसू,
दर्द में तड़पता देख, हँसता रहा कमाल हुआ !!
वो चंद दिनों का पागलपन, वो चंद दिनों का शरूर,
हकीकत समझ रहा था जिसे, बाद में मजाक हुआ !!
कत्ल हुआ था इरादों का, पर मातम मनाया यादो ने,
किसका गम हम छुपाते, जब अपना आंसू ही शराब हुआ !!
कैसे कहे हम अपना गम, जब भींगा हो दर्द से मन,
मिटटी का घरौंदा टूट गया और सपना जल राख हुआ !!
मेरी एक हंसी से वो नाराज हुआ !!
वो देख नहीं सकता था मेरी आँख में आंसू,
दर्द में तड़पता देख, हँसता रहा कमाल हुआ !!
वो चंद दिनों का पागलपन, वो चंद दिनों का शरूर,
हकीकत समझ रहा था जिसे, बाद में मजाक हुआ !!
कत्ल हुआ था इरादों का, पर मातम मनाया यादो ने,
किसका गम हम छुपाते, जब अपना आंसू ही शराब हुआ !!
कैसे कहे हम अपना गम, जब भींगा हो दर्द से मन,
मिटटी का घरौंदा टूट गया और सपना जल राख हुआ !!
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