Monday, 8 November 2010

कोमल कल्पना

कोमल कल्पना को तोलकर, भावो को शब्दों में बोलकर,
पा लू मै भींगी कामना, पी लू यादो को घोलकर !

ना करू सच का सामना, ना ही कोई और कामना,
बस आखिरी सांस भी निकले तो तेरा नाम बोलकर !!

दुःख के गर्भ में, अंतिम वर्ष में, एहसास तुम्हारा हो,
यही थकती आखो से प्राथना है हाथ जोड़कर !

धुंधली आखो को आसूओ ने दिया है उजाला,
थमती सासों को धड़कन दिया तेरा नाम बोलकर !!

अब भी अंकित है मेरे दिल में तेरी छवि,
पर बढ़ते कदम थम जाते है कुछ सोचकर !!

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