Monday, 8 November 2010

कोमल कल्पना

कोमल कल्पना को तोलकर, भावो को शब्दों में बोलकर,
पा लू मै भींगी कामना, पी लू यादो को घोलकर !

ना करू सच का सामना, ना ही कोई और कामना,
बस आखिरी सांस भी निकले तो तेरा नाम बोलकर !!

दुःख के गर्भ में, अंतिम वर्ष में, एहसास तुम्हारा हो,
यही थकती आखो से प्राथना है हाथ जोड़कर !

धुंधली आखो को आसूओ ने दिया है उजाला,
थमती सासों को धड़कन दिया तेरा नाम बोलकर !!

अब भी अंकित है मेरे दिल में तेरी छवि,
पर बढ़ते कदम थम जाते है कुछ सोचकर !!

Sunday, 24 October 2010

एक चेहरा चाँद सा

एक चेहरा चाँद सा,

अमावास को चीरता,
सन्नाटे में चीखता,
बारिस में भींगता,
सवच्छ निर्मल शांत सा !
एक चेहरा चाँद सा !!

आखो में झांकता,
खुद से भागता,
नींद में जागता,
भीड़ में एकांत सा,
एक चेहरा चाँद सा !!

आखो में डूबकर,
चलते हुए मुड़कर,
हौले हौले थमकर,
मेरे दिल को संभालता,
एक चेहरा चाँद सा !!

अदाओ में नजाकत,
दिल में मोहब्बत,
आखो में सिकायत,
जैसे तीर में कमान था,
एक चेहरा चाँद सा !!

एकांत

दोपहर की उमस में,
उदास मन,
गरम हवाओ के संग,
सूखे पत्तो की सरसराहट,
और,
मन के उजरे कोने में,
तुम्हारे कदमो की आहट,
इन सब से अलग,
कुछ और भी उजरा है !!

मिटटी में आई दरार तो है नहीं,
की आसूओ से भर दू,
मन में आई फ़ास है,
एक काटा है जो चुभता है,
हर पल के साथ,
दिल के बंद कमरे में,
विरह के टूटे माले सा !!

कैसे बीतेगा हर पल,
दर्द के साथ,
काश की भर जाता जख्म,
वक़्त के साथ !!

Saturday, 23 October 2010

इंतज़ार की रात

सहमी सी रात में तनहा था मै,
तन्हाई थी घिरी, और सहमा था मै !!

कई वादे थे टूटे, मेरा दिल भी था टुटा,
दुनिया की भीड़ में, बड़ा तनहा था मै !!

कहने को कितने यार-यगाने थे मेरे,
जीने के और भी बहाने थे मेरे,
एक वक़्त था, जब किसी का गहना था मै,
पर आज की रात, बड़ा तनहा था मै !!

छोर आये अपनी ख़ुशी किसी और की आखो में,
सौप दी अपनी अमानत, किसी और की बाहों में,
नींद है रूठी हुई, राते मेरी जागी हुई,
कैसे बीतेगी ये रात, सहमा तनहा था मै,

सहमी सी रात में तनहा था मै,
तन्हाई थी घिरी, और सहमा था मै !!